छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने हेतु छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने चलाया व्यापक हस्ताक्षर अभियान !

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छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने हेतु छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने चलाया व्यापक हस्ताक्षर अभियान

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कराने की लंबे समय से लंबित मांग को लेकर आज छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना द्वारा शहर में एक विशाल हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। इस अभियान में विभिन्न सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों तथा बड़ी संख्या में आम जनता ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और छत्तीसगढ़ी भाषा को अधिकारिक मान्यता दिलाने की मांग के समर्थन में हस्ताक्षर किए।

अभियान के दौरान छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के जिला संयोजक अनिल पाली ने लोगों को बताया कि छत्तीसगढ़ी मात्र बोली नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा, इतिहास, लोककला और अस्मिता की आधारशिला है। बावजूद इसके, आज तक इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ी भाषा करोड़ों लोगों की मातृभाषा है और शिक्षण, मीडिया, साहित्य, प्रशासन तथा संचार के क्षेत्र में तेजी से विस्तार और उपयोग में बढ़ोतरी हो रही है।

क्रान्ति सेना के युवा अध्यक्ष मनोज कौशिक ने कहा हस्ताक्षर अभियान पूर्ण होने के बाद, छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति महोदय के नाम संबोधित ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा। ज्ञापन में संगठन ने मांग की है कि छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में जल्द से जल्द शामिल करते हुए इसे आधिकारिक दर्जा प्रदान किया जाए।

संगठन के जिला उपाध्यक्ष संजू भोयरा ने कहा—“छत्तीसगढ़ी हमारी पहचान और हमारी मातृभाषा है। इतने बड़े जनसमर्थन के बावजूद इसे अब तक संविधानिक दर्जा नहीं मिल पाया है। जब तक छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में स्थान नहीं मिलता, छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना अपना अभियान जारी रखेगी और चरणबद्ध आंदोलन भी चलाएगी।”

भुनेश्वर रजक ने बताया कि जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और युवाओं ने भी अभियान में शामिल होकर कहा कि यह केवल एक संगठन का प्रयास नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़िया समाज की एकजुट आवाज़ है।

अंत में, छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने केंद्र सरकार से मांग की कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता और भाषाई अधिकारों का सम्मान करते हुए छत्तीसगढ़ी भाषा को शीघ्र ही संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। इससे प्रदेश की शिक्षा, संस्कृति, साहित्य, प्रशासन और रोजगार के क्षेत्र में भाषा का सम्मान और उपयोग और अधिक बढ़ेगा इस कार्यक्रम में अजय सूर्या, अश्वनी गोयल, राकेश कैवर्त, रामायण निषाद, विश्राम साहू, सतीश, बॉबी पात्रे, पुनिराम सूर्यवंसी, मुकेश यादव, ।

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